बोम्बे हाई कोर्ट केस के अखबार, १३ अप्रैल २०१८

अल दाई अल अजल सैयदना ताहेर फखरुद्दीन (त.उ.श.) की ज़बानी बोम्बे हाई कोर्ट में १३ वी अप्रैल २०१८ के रोज़ दोपहर के वक़्त दुबारा शुरू हुई. सैयदना फखरुद्दीन ने दावत के केस नं. ३३७/२०१४ में वादी की हैसियत से गवाही दी. नामदार जस्टिस गौतम पटेल के कोर्ट में ज़बानी शुरू हुई.

कुल मिलाकर दो सत्रों में शेह्ज़दा मुफद्दल सैफुद्दीन (प्रतिवादी) के वकील सीनियर काउन्सिल मोहतरम इकबाल चागला ने सैयदना फखरुद्दीन से ३० सवाल पूछे. साल २०१५ में केस में ज़बानी शुरू हुई और सैयदना कुत्बुद्दीन (री.अ.) से ५४४ सवाल पूछे गए, और सैयदना फखरुद्दीन की ज़बानी शुरू हुई तब से आप को ७६३ सवाल पूछे गए है. सैयदना कुत्बुद्दीन और सैयदना फखरुद्दीन से कुल मिलाकर अब तक १३०७ सवाल पूछे गए है.

इकबाल चागला ने सैयदना फखरुद्दीन को कुरआन मजीद में से कुछ आयतें दिखाई और पूछा कि क्या इन आयतों में यह बताया गया है कि वसीयत (वसीयतनामा) के लिया मर्दों में से २ शाहिदों (साक्षी) की ज़रुरत है? सैयदना फखरुद्दीन ने फरमाया कि ऐसा नहीं है. यहाँ दुनियावी वसीयत करने के बारे में बताया गया है और ऐसी वसीयत करने के १ या २ वैध तरीके बताए गए है. इकबाल चागला ने फिर पुछा कि ऐसी कौन सी वसीयत है जो दुनियावी नहीं होती? सैयदना ने फरमाया कि नस्स (एक दाई का अपने जानशीन को काइम करना) भी एक तरह की वसीयत है लेकिन वह सिर्फ दुनियावी उमूर के लिए नहीं होती.

इकबाल चागला ने सैयदना से पुछा कि क्या वसीयत का मतलब “विल” (वारिस नामा) है? सैयदना फखरुद्दीन ने जवाब फरमाया कि यह  “वसीयत” के लफ्ज़ की प्रचलित माना है. किसी को नसीहत करना, सलाह देना कि इस तरह बर्ताव करना चाहिय, इस तरह अमल करना चाहिए, या किसी को आदेश देना, इसे भी वसीयत कहा जा सकता है.

फिर सैयदना फखरुद्दीन से यह सवाल किया गया कि क्या नस्स दाउदी बोहरा कौम के मज़हबी सिद्धांतों के अनुसार एक वसीयत है?  सैयदना ने फरमाया कि हाँ, और आपने यह स्पष्ट किया कि वह वसीयत जो नस्स है, वह दुनियावी वसीयत से कई पहलुओं में अलग है.

इकबाल चागला ने सैयदना को किताब मुख्तसरुल आसार (जो सैयदनल काज़ी अल-नोमान ने लिखी है जो इमाम मोइज़ के असरे मैमून में काज़िल कुज़ात थे (चीफ जस्टिस) और जिनका दावत के हुदूद में ऊँचा दर्जा था) में से एक लेख बताया और पुछा कि क्या वसीयत बिना शाहिद के की जा सकती है? सैयदना फखरुद्दीन ने फ़रमाया कि हाँ, की जा सकती है. आपने यह भी फरमाया कि सैयदनल काज़ी अल-नोमान दूसरें किताब में फरमाते है कि यदि तुम्हें कोई दूसरा शाहिद (निष्पक्ष गवाह) न मिलें तो भी वसीयत करो क्योंकि रसुलुल्लाह ने फरमाया है.

इकबाल चागला ने सैयदना को आपकी याचिका (प्लेंट) और एफिडेविट ऑफ एविडेंस दिखाई और पूछा कि क्या आपकी गवाही कि ७ वे दाई (सैयदना अहमद बिन अल-मुबारक री.अ.) ने आपके माज़ून ८ वे दाई (सैयदना हुसैन बिन अली री.अ.) पर खानगी तौर से नस्स की और यह नस्स का कोई भी बाहरी शाहिद नहीं था, सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) ने लिखी अरबी इबारत “फमा अशहदा अल-शोहदाअ ज़ाहेरन वमा नस्स अलैहे ज़ाहेरन” पर आधारित है, जो इबारत सैयदना ताहेर सैफुद्दीन (री.अ.) की १३६३ ही. की रिसालत शरीफा “मशरबतो तस्नीमे नूर” में है? सैयदना ने फरमाया कि हाँ, और आपने यह भी फरमाया कि इसके अलावा यह गवाही ५२ वे दाई सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के एक बयान के अनुसार भी है, जो आपने १० वी फ़रवरी २००५ के दिन आपकी वाअज़ में फरमाया था, कि ८ वे दाई ने यह शहादत दी कि आपके ऊपर ७ वे दाई ने नस्स की है और जबकी इस नस्स का कोई शाहिद नहीं था, आपकी (८ वे दाई की) शहादत काफी थी.

नामदार जस्टिस गौतम पटेल ने आइन्दा सैयदना के क्रोस एक्जामिनेशन के लिए ५ दिन मुक़र्रर किए है. २० और २१ वी जून और ३,४,५ वी जुलाई २०१८ की तारीखें दी है.